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पटना: बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को टाल दिया गया है। सरकार ने पंचायतों में विकास कार्य जारी रखने के लिए परामर्शी समिति का गठन किया है। सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक आदेश जारी किया है। जिसके अनुसार संबन्धित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिनिधि का पंचायती राज संस्था को पूर्ण या आंशिक रूप से नगर निकाय में शामिल किए जाने से पहले परामर्शी समिति में कोई स्थान नहीं होगा।

पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी दी कि संबंधित पंचायत क्षेत्र को जिस तारीख से नगर निकाय में शामिल किए जाने पर आखिरी अधिसूचना जारी की गई है उस तारीख़ से संबंधित प्रतिनिधि पंचायत के पदधारक नहीं रहे। सूत्रों के मुताबिक परामर्शी समिति के गठन के बाद से वे पंचायतें असमंजस में पड़ गई थीं जिन्हें अब नगर निगम में शामिल किया गया है। इसलिए सरकार ने यह आदेश जारी करते हुए सब स्पष्ट कर दिया। स्पष्ट रूप से कहा जाए तो अगर किसी पंचायत को नगर निकाय में पूरी तरह शामिल कर लिया गया हो तो ग्राम पंचायत के मुखिया समेत सभी सदस्य अपने पद से मुक्त हो जाएंगे। यदि कुछ ही वार्डों को नगर निकाय में शामिल किए गए हो तो उन वार्ड का नेतृत्व कर रहे सदस्य भी अपने पद से मुक्त होंगे। ये निर्देश ग्राम पंचायत के साथ-साथ ग्राम कचहरी और जिला परिषद पर भी लागू होते हैं।

बिहार की 237 ग्राम पंचायतें ऐसी है जिन्हें पूर्ण रूप से नगर निकाय में शामिल किया गया है। वहीं 194 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनके कुछ क्षेत्रों को ही नगर निकाय में शामिल किया गया है। दरअसल कोरोना महामारी के कारण पंचायत चुनाव को टाला गया। 15 जून को ही पंचायत का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और ऐसे में गॉंवों में उचित संचालन और विकास के लिए सरकार ने परामर्शी समिति बनाई। इसके तहत राज्य के लगभग साढ़े आठ हजार सरपंच, 534 प्रखंड प्रमुख और 38 जिला पार्षद इस समिति के अध्यक्ष रहेंगे।

 

 

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