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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। भाजपा उत्तर प्रदेश में सत्ता बनाए रखने के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। इसी कारण भाजपा अपने पुराने सहयोगियों को पार्टी में लाने की ताक में है। बता दें कि गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह अपना दल(एस) की नेता अनुप्रिया पटेल और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद से मिले। इसके अतिरिक्त भाजपा के साथ सुभासपा के अध्यक्ष ओपी राजभर को गठबंधन करने का खुला रास्ता भी दे दिया।

दरअसल बीजेपी ने पूर्वांचल में ओमप्रकाश राजभर को अपने साथ गठबंधन करने को लेकर मुहिम शुरू कर दी है। पूर्वांचल के एक बड़े भाजपा नेता के माध्यम से उनसे जुड़ने की कोशिश की जा रही है। भाजपा के ये नेता दिल्ली आलाकमान और ओमप्रकाश राजभर दोनों के ही काफी करीब है। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेता ओपी राजभर से दो बार इस विषय पर विचार-विमर्श कर चुके है और इस दौरान उन्हें कैबिनेट में वापसी का भरोसा दिलाया गया है। इस संदर्भ में ओपी राजभर ने कहा है कि यदि आज भाजपा सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू कर देती है तो वह भाजपा के साथ खड़े होने के लिए तैयार है।

दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2019 के लोकसभा चुनाव के मतदान खत्म होने के बाद अगले दिन ही ओपी राजभर को कैबिनेट से निकाल दिया था। इसका कारण यह था कि राजभर सत्ता में आने के एक वर्ष बाद से ही लगातार ओबीसी समुदाय की समस्याओं के विषय में मुख्यमंत्री योगी और भाजपा पर तीखे हमले बोल रहे थे। जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कैबिनेट से बाहर कर दिया गया था।

हालांकि अब भाजपा राजभर को अपने साथ खड़ा होते देखना चाहती है और इसलिए वह राजभर की पैरवी में जुटी है। दरअसल उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में राजभर की पार्टी का पूर्वांचल में काफी अच्छा प्रदर्शन रहा। राजभर की पार्टी ने वाराणसी में जीत भी हासिल की। जिसके बाद भाजपा ने राजभर को अपने साथ लाने का फैसला किया और जिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट लागू करने के विषय में राजभर ने कहा है उसे लेकर भी भाजपा विचार कर रही है। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए 31 जुलाई 2021 तक की अवधि दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले इसे लागू कर दिया जाएगा। इस रिपोर्ट के लागू होने से ओबीसी आरक्षण का फॉर्मूला 4 भागों में बंट जाएगा जिससे उन ओबीसी जाति के लोगों को फायदा मिलेगा जिन्हें अब तक आरक्षण का फायदा नहीं मिल पाया था।

बता दें कि ओपी राजभर समुदाय पूर्वांचल में एक ऐसा समुदाय है जिनका वोट किसी भी राजनीतिक समीकरण को बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है। ओपी राजभर को कैबिनेट से निकालने के बाद भाजपा ने राजभर के वोट अपने पक्ष में करने के लिए अनिल राजभर को आगे किया है। गाजीपुर, वाराणसी, मऊ, बलिया और आजमगढ़ में कई सीटें हासिल करने के कारण ही ओपी राजभर को भाजपा अपने साथ लाना चाहती है।

 

 

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