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नई दिल्ली: देश कोरोना महामारी की दूसर लहर के आवे जीतता नज़र आ रहा है लेकिन अब एक दूसरी बीमारी के मामले सामने आते दिखाई दे रहे हैं। दक्षिण नागरिक निकाय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में इस साल 22 मई तक डेंगू के पच्चीस मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2013 के बाद से जनवरी-मई की अवधि में सबसे अधिक है। सोमवार को रिपोर्ट में कहा गया कि इसी अवधि के दौरान मलेरिया के आठ और चिकनगुनिया के चार मामले भी दर्ज किए गए। आमतौर पर जुलाई से नवंबर के बीच दिल्ली में वेक्टर जनित बीमारियों के मामले सामने आते हैं और मध्य दिसंबर तक अवधि बढ़ सकती है।

राष्ट्रीय राजधानी में वेक्टर जनित रोगों के आंकड़ों को सूचीबद्ध करने वाली नोडल एजेंसी दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 22 मई तक डेंगू के 25 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि जनवरी में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, फरवरी में दो, मार्च में पांच, अप्रैल में 10 और मई में आठ मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि इस साल अब तक शहर में डेंगू से कोई मृत्यु की खबर नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार एक जनवरी से 26 मई 2013 के बीच डेंगू के सात मामले, 2014 में तीन, 2015 में नौ, 2016 में आठ, 2017 में 19 और 2018 में 15 मामले, 2019 में 11 और 2020 में 18 मामले दर्ज किए गए थे। जबकि इस साल दिल्ली में 22 मई तक मलेरिया के आठ और चिकनगुनिया के चार मामले दर्ज किए गए हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 20 मई को सुबह 8:30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में चक्रवाती तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में दिल्ली में रिकॉर्ड 119.3 मिलिमीटर बारिश हुई थी। यह 24 मई 1976 को 60 मिमी की पिछली रिकॉर्ड वर्षा से दोगुनी थी। बता दे कि डेंगू के मच्छर साफ खड़े पानी में पनपते हैं, जबकि मलेरिया के मच्छर गंदे पानी में भी पनपते हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि डेंगू और चिकनगुनिया के शुरुआती मामलों को देखते हुए ही सावधानी बरती जाए।

 

 


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