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नई दिल्ली: कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार को बढ़ाने के लिए ज़रूरी है कि पहले लोगों के अंदर से उस डर को निकाला जाए जो उन्हें वैक्सीन को लेकर है। हालांकि इस डर को खत्म करना सरकार के लिए एक बड़ी और कठिन चुनौती है। मुस्लिम समुदाय में टीके को लेकर फैले इसी डर पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया कि लोगों में टीके को लेकर जो डर या गलतफहमी है उसे दूर करने के लिए हज समितियों, वक़्फ़ बोर्ड, केंद्रीय वक्फ परिषद और स्वयं सहायता समूहों को ‘जान है तो जहान है’ की मुहिम में शामिल किया जा रहा है

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मुंबई के एक NGO और साथ ही मुस्लिम मौलवियों ने इस जागरूकता अभियान के लिए हामी भरी है। वे शहर के झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर उन्हें टीके के लिए जागरूक करेंगे। दरअसल मुंबई के एनजीओ ‘भामला फाउंडेशन’ ने शहर के अलग-अलग मस्जिद समितियों से मौलानाओं को इस अभियान के लिए साथ देने का आग्रह किया है। यह समूह लोगों में वैक्सीनेशन को लेकर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ लोगों के लिए वैक्सीनेशन स्लॉट बुक करने का भी प्रबन्ध करेगा। एनजीओ के अध्यक्ष आसिफ भामला ने जानकारी दी कि इस कदम से वैक्सीनेशन को लेकर मुस्लिम समुदाय में भरोसा पैदा हो सकेगा। लोगों को टीके को लेकर कई सारी गलतफहमियां है और इसी वजह से वे टीका लेने से डर रहे हैं। इसलिये भामला फाउंडेशन ने मौलवियों को अपने साथ शामिल किया ताकि वह मुसलमानों के अंदर से वैक्सीन को लेकर जो डर है उसे निकाल सके।

वैक्सीन को लेकर जागरूकता अभियान में शामिल मौलाना तबरेज़ ने कहा कि कोरोना वैक्सीन को लेकर कुछ लोगों में यह गलतफहमी है कि यदि वह वैक्सीन लेंगे तो वह मर जाएंगे। वहीं कुछ लोगों को टीके के साइड इफेक्ट से भी डर है। इन्हीं गलत धारणाओं को मिटाने के लिए हम सभी दो शिफ्टों में जाकर लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक करेंगे। मौलाना तबरेज़ ने बताया कि वे एक दिन में कम से कम 100 से 150 लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

 

 

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