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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने पर मीराबाई चानू को फ़ोन करके जीत की बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। मीराबाई चानू ओलंपिक में मेडल जीतने वाली भारत की दूसरी वेटलिफ्टर बन गई है। बता दें कि उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में 49 किलोग्राम वर्ग में रजक पद जीता है। इससे पहले सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक हासिल किया था।

ओलंपिक की भारोत्तोलन प्रतियोगिता में भारत को पदक हासिल करने के लिए 21 साल का इंतेज़ार करना पड़ा और अब जाकर यह इंतेज़ार खत्म हुआ है। मीराबाई चानू ने 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पद हासिल किया है। इस जीत ने मीराबाई चानू के उस ज़ख्म को भर दिया जो उन्हें 5 साल पहले रियो में असफल होने पर मिला था। उस समय मीराबाई चानू खेलों के महासमर में निराश होते हुए मंच से रोती हुई गईं थीं। लेकिन आज उन्होंने न केवल अपने चेहरे की मुस्कान वापस ले ली बल्कि देश को भी गर्व करने का अवसर दिया है। भारत के लिए ये ऐतिहासिक जीत है जिससे भारत पदक तालिका में दूसरे स्थान पर आ गया है। इससे पहले देश को इतनी बड़ी उपलब्धि कभी नहीं मिली थी। बता दें कि मीराबाई चानू का यह प्रदर्शन कर्णम मल्लेश्वरी के सिडनी ओलंपिक से भी बेहतर था।

मणिपुर की 22 वर्षीय मीराबाई चानू ने कुल 202 किलोग्राम का भार उठाया था। इस प्रदर्शन ने उनके रियो ओलंपिक के खराब प्रदर्शन की भरपाई कर दी। अपनी इस सफलता के बाद मीराबाई चानू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं बहुत खुश हूं, मैं पिछले 5 सालों से इस दिन के सपने देख रही थी। इस वक़्त मैं खुद के गर्व महसूस कर रही हूं। हालांकि मैंने स्वर्ण पदक के लिए पूरी कोशिश की थी लेकिन रजत पदक भी मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। बता दें कि मीराबाई चानू कुछ महीनों से अमेरिका में प्रशिक्षण ले रहीं थीं। साल 2016 में अपने खराब प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि इतने बड़े मंच पर अपने पदार्पण को लेकर वे बहुत घबराई हुईं थीं। जब उनसे सवाल किया गया कि मणिपुरी होने के नाते उनके लिए इस उपलब्धि के क्या मायने हैं तो उन्होंने कहा कि मैं भारत के लिए पदक जीतकर बहुत खुश हूं, मैं केवल मणिपुर की नहीं बल्कि पूरे देश की हूँ।

मीराबाई चानू आज काफी आत्मविश्वासी नज़र आईं और अपने प्रदर्शन के दौरान भी वे मुस्कुराती रहीं। इस दौरान उनके कानों में ओलंपिक रिंग के समान बूंदे साफ दिखाई दे रहे थे जो कि उनकी मां ने चानू को तोहफे के रूप में दिए थे।

 

 

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